मिलिए इस DM से, खुद जमीन पर और फरियादियों को कुर्सी पर बैठाकर करतीं हैं सुनवाई

क्या आपकी नजर से अब तक ऐसी कोई तस्वीर गुजरी है, जिसमें कोई डीएम खुद फर्श पर बैठा हो और फरियादी कुर्सी पर। शायद नहीं। मगर देश की एक महिला आईएएस अफसर में सेवा-भावना इतनी कूट-कूट कर भरी है कि वह असहाय फरियादियों को देखकर घुटनों के बल बैठकर भी सुनवाई करतीं हैं। नाम है रोहिणी रामदास। फिलहाल तमिलनाडु के सलेम जिले की कलेक्टर हैं। सुबूत के तौर पर ऐसी ही एक तस्वीर आपके लिए हम जनसुनवाई दरबार की दिखा रहे, जिसमें दिव्यांगों को कुर्सी पर बैठाकर वह जमीन पर बैठकर शिकायतें सुन रहीं हैं। एक सच्चे लोकसेवक की यह तस्वीर उन सभी आईएएस-आईपीएस के लिए मिसाल है, जो पद के अहंकार में चूर होकर खुद को लॉटसाहब मान बैठते हैं। उन अफसरों के लिए यह तस्वीर नसीहत देती है जो बहुत ऐंठन और गुरुर में लोगों से मिलते हैं। इंडिया संवाद ने सलेम जिले के कुछ लोगों से बात की तो पता चला कि यहां की कलेक्टर रोहिणी रामदास हमेशा गरीबों की सुनवाई करतीं हैं। दफ्तर हो या घर। अगर कोई फरियादी पहुंचता है तो उसे उचित सम्मान देकर बैठाया जाता है, फिर उसकी शिकायत का डीएम निवारण करतीं हैं।

गरीब कहते हैं-अफसर नहीं ये देवी हैं

तमिलनाडु के इस जिले के 227 साल के इतिहास में रोहिणी पहली महिला कलेक्टर हैं। 1790 से अब तक यहां सभी पुरुष डीएम रहे। गरीबों की हर शिकायत को गंभीरता से सुनकर तत्काल निवारण की उनकी कला की जनता कायल है। एक स्थानीय पत्रकार सूर्यप्रकाश इंडिया संवाद से बातचीत में कहते हैं-जिले के गरीब रोहिणी को अफसर नहीं मानो देवी मानते हों।

किसान की बेटी कैसे बनी कलेक्टर

जब रोहिणी नौ साल की थीं। तब उन्होंने देखा कि उनके पिता के साथ तमाम किसान खाद-बीज के लिए चक्कर लगाने को मजबूर थे। हर बार शहर जाकर खाली हाथ लौट आते थे। सिस्टम की लालफीताशाही से किसानों को सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं मिल रहा था। बेटी ने पापा से पूछा-आपको खाद-बीज क्यों नहीं मिल रहा। पिता बोले-बेटी डीएम साहब हम किसानों की नहीं सुन रहे। बेटी ने कहा-डीएम बहुत बड़ी चीज होते हैं क्या। पिता बोले-हां। बस उस लड़की ने कलेक्टर बनने की ठान ली। सपना पूरा कर ही दम लिया। जब रोहिणी ने पूछा कि आखिर किसकी लापरवाही से लाभ नहीं मिल रहा है, तब पिता ने कहा था-बेटी कलेक्टर साहब की वजह से। तभी से उस नौ साल की रोहिणी ने आईएएस बनने की ठान ली। आखिरकार रोहिणी का अफसर बनने का सपना पूरा हुआ। सरकारी स्कूल से शुरुआती शिक्षा और गवर्नमेंट कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद रोहिणी ने सिर्विस सर्विसेज परीक्षा में सफलता हासिल की।

टीचर के न आने पर खुद पढ़ाने लगीं डीएम

डीएम रोहिणी एक बार रास्ते से गुजर रहीं थीं। करुथरजपालयम गांव के स्कूल पर नजर पड़ी तो देखा फील्ड में बच्चे टहल रहे हैं। स्कूल में पहुंची तो पता चला कि शिक्षक के न आने पर यह हाल है। इस पर उन्होंने कक्षा एक, दो और तीन के बच्चों को खुद तमिल और अंग्रेजी पढ़ाई। बच्चों से कहा कि वह मेहनत कर पढ़ाई करें और अपने सपनों को पूरा करें। बच्चे भी डीएम से पढ़कर खुश हुए। रोहिणी कहतीं हैं कि उनकी सफलता में पिता रामदास पांडुरंग और आईपीएस पति विजयेंद्र का अहम योगदान है।

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